स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर-चाम्पा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय---छोटा शहर
शीर्षक----छोटा शहर
हम छोटा शहर वाले, तुम बड़ा नगर वाले ।
अपना गुजारा यहीं है,हम है इसके मतवाले ।
हम भी इक दिन बन जायेंगे, आयेगा वो दिन ।
हमारे पास भी वही आकाश है,वही है जमीन ।
धीरे आगे बढ़ जायेंगे, सपना हम भी हैं पाले ।
हम भी महलों में रहेंगे, जो आकाश से बात करेगा।
सब संसाधन उपलब्ध रहेंगे, अभावों में नहीं जीयेगा ।
कोमल सड़कों में चलेंगे, पांवों में नहीं पड़ेंगे छाले ।
सुख सुविधा हमको भी मिलेगा, पायेंगे सभी साधन ।
हाथों से हम भी काम न करेंगे, मशीन से होगा उत्पादन ।
थोड़ा बहुत चलता है अंधेरा,हो चलेंगे देखना उजाले ।
मान हमारा भी बढ़ जाएगा, जैसे अभी तुम पा रहे ।
हम भी मुस्कायेगें देखना, जैसे तुम मुस्कुरा रहे ।
हम भी गोरे हो जायेंगे, रहने दो चला लेगें काले ।
No comments:
Post a Comment