स्थान - दुर्ग (छ.ग.)
विधा -मुक्त
विषय -छोटा शहर
शीर्षक- मेरा छोटा सा शहर
हाँ मेरा वो छोटा सा शहर,
पर रहते बड़े दिलवाले
जहाँ गुजरा मेरा बचपन,
हर गली में बसती यादें,
विकास की दौड़ लगाते,
जाने पहचाने अपने लोग
मकान आलिशान नहीं
पर ऊँचे ख्वाब हैं पाले ।
राजा महाराजाओं की नगरी
पर कुछ सुविधाओं की कमी
मन व्यथित कर देती है,
सड़कें उबड़-खाबड़
चलना हुआ है दूभर ।
चिकित्सा सुविधा के नाम पर
बरसों से ठगे ये जा रहे,
दुर्घटना, गंभीर बीमारी में
बड़े शहरों के मुँह ताकते।
प्यार अपनापन बरसता,
प्राकृतिक सौदर्य अनुपम
पहाड़ो से घिरा सुंदर कांकेर
लुभाते यहांँ के घने वन
महानगरों में रहने वालों
कभी आकर देखो यहांँ का जीवन ।।
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