जिला - बलौदाबाजार (छ. ग )
विषय - खगोल विज्ञान
विधा - कविता
शीर्षक - खगोलीय संरचना
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// खगोलीय संरचना //
आकाशीय पिंडो का वर्णन ,
गति - स्थिति का सम्यक ज्ञान ।
खगोल विज्ञान के माध्यम से ,
होती है इसकी पहचान ।।
ग्रह नक्षत्र तारे असंख्य हैं ,
अद्भुत यह ब्रम्हांड ।
अंतरिक्ष मे आकाश गंगा ,
अत्यधिक दूर विद्यमान ।।
घनी अँधेरी रात में जब ,
देखते हैं आकाश की ओर ।
टिमटिमाते अगणित तारे ,
विशाल छतरी ओर न छोर ।।
जाने कितने सौर परिवार ,
सूर्य चन्द्र पृथ्वी गतिशील ,
इस अनन्त असीम अंतरिक्ष मे ,
बँधे हुए सब डोर विहीन ।।
कोपरनिकस कैपलर गैलीलियो ,
न्यूटन और आइंस्टीन ।
विश्व के महान खगोलशास्त्री ,
जो किये आधुनिक खोजबीन ।।
आर्यभट्ट भास्कराचार्य द्वय ,
वराहमिहिर खगोलज्ञ ।
विक्रम साराभाई मेघनाथ साहा ,
भारत के वैज्ञानिक सुज्ञ ।।
सृष्टि की विशाल संरचना ,
जाने समझे कौन भला ?
मानवीय जिज्ञासा बनी रहेगी ,
बुद्धि - विवेक का बल जो मिला ।।
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