जिला :- महासमुंद
विषय :- कागज़ की कश़्ती
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- बचपन की यादें
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ओ पहली बारिश की फुहारें,
ओ कागज़ के कश़्ती की सवारी।
लहरों सी उठती - गिरती यादें,
और वो बचपन की ख़ुमारी।
ओ बादलों संग उड़ने की चाहत,
तितली के पीछे भागती किलकारी।
किताबों के पीछले पन्नों में,
कलम से सजती फुलवारी।
कहानी के पात्रों की नकल,
गुरुगण की देखा देखी अदाकारी।
सदा साथ खड़े सुख दुख में,
साथ में एक दूजे की टांग खिंचती यारी।
अनुपम अनुभव बटोरती,
नव जीवन सृजन की तैयारी।
ना होती चिंता किसी भी बात की,
रंग भरती जीवन में ज्यों पिचकारी।
शनै शनै सब बीत गया जी,
अब है कांधे पर जिम्मेदारी।
डूब गई वो कागज़ की कश़्ती,
बीती बचपन कितनी प्यारी।
चिंता युक्त यौवन मिला अब,
है सफल होने की महामारी।
पैसों के पीछे भागे हम,
गुम होती कलाकारी।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने बचपन की मीठी यादों को शब्दबद्ध करते हुए कागज की कश्ती, किताबों के पीछे की कलाकारी इत्यादि का चित्रण करने का प्रयास किया है।
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