पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
विषय :- सफलता
कर पुरे मन से प्रयास |
बार बार कर अभ्यास |
खुद पर रख विश्वाश |
हर पल हर श्वाश |
सफलता मिलेगी कर्म किये जा |
मनुज का काम यही जीवन जिए
जा |
भाग्य भरोसे जहाँ कर्म हार जाता है |
वहीँ हार जीत से बाजी मार जाता है |
मन के अँधेरों से सूरज हार जाता है |
प्रयत्न वो दीपक जिससे तिमिर खबराता है |
मेहनत कर कठोर सागर में सेतु किये जा |
मनुज का तो काम यही जीवन जिए जा |
छोटी सी चींटी भी पहाड़
चढ़ जाती है |
गिरती है बार बार तनिक नहीं
घबराती है |
असफलता ही सफलता की कुंजी हमें सीखा जाती है |
कार्य असंभव कोई नहीं जग में
दिखा जाती है |
कोमल मन में हौसला लिए अपार नए उदाहरण दिए जा |
मनुज का तो काम यही जीवन
जिए जा |
जीवन पथ में सफल वही जो परिश्रम दिन रात करे |
हो हिमालय सा अडिग परिस्थिति से न डरे |
रास्ते की हर बाधा को सत्कर्म से हरे |
आलस और कुकर्म से जो रहे
परे |
क़दमों में सफलता होगी नीलकंठ सा विष पिए जा |
मनुज का काम यही जीवन जिए जा |
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