Monday, November 2, 2020

कसडोल से चेतन सिंह की रचना- रिश्ते

रचनाकार-- चेतन सिंह
पता-------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विधा ------ ग़ज़ल
शीर्षक ---- रिश्ते
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इस     मतलब  परस्त  दुनिया में ,
रिश्तों      को  कौन   निभाते  हैं !
सिक्कों की खनक के दम पर ही ,
यहां         हर          नाते      हैं !
            जिनके   पास   रंगीनियां   है ,
            कारवां भी  उनके   साथ   हैं !
            गरीबों   की  तकदीर देखिए ,
            हर ग़म को तन्हा सह जाते हैं !
हमने    तो   भगवान   को  कम ,
रूपये को अधिक पूजते देखा है !
रिश्तों  की  फिर क्या अहमियत , 
जब  लोग  रब  को भूल जाते हैं !
            पल   भर  में  यहां  हर  रिश्ते ,
            बदल         जाया    करते   हैं !
            हम  समझते  रहे जिसे अपना ,
            पराये      बन        जाते     हैं !
राखी  के  धागों  का मोल भी ,
अब      कम   होने   लगा   हैं !
इस  पाक  रिश्ते  में भी  अब ,
फासले अधिक नज़र आते हैं !
           आजकल के बेटे श्रवण बन जाए ,
           ऐसा          कहां     होता       है !
           जहां  देखी   दौलत  की  चमक , 
           मां-बाप  का  कत्ल  कर जाते हैं !
इंसानों    के   बीच  एक रिश्ता ,
होता    है     इंसानियत     का !
इंसा अब इंसा रहे नहीं इसीलिए ,
 इंसानियत का ख़ून कर जाते हैं !

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