पता-------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विधा ------ ग़ज़ल
शीर्षक ---- रिश्ते
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इस मतलब परस्त दुनिया में ,
रिश्तों को कौन निभाते हैं !
सिक्कों की खनक के दम पर ही ,
यहां हर नाते हैं !
जिनके पास रंगीनियां है ,
कारवां भी उनके साथ हैं !
गरीबों की तकदीर देखिए ,
हर ग़म को तन्हा सह जाते हैं !
हमने तो भगवान को कम ,
रूपये को अधिक पूजते देखा है !
रिश्तों की फिर क्या अहमियत ,
जब लोग रब को भूल जाते हैं !
पल भर में यहां हर रिश्ते ,
बदल जाया करते हैं !
हम समझते रहे जिसे अपना ,
पराये बन जाते हैं !
राखी के धागों का मोल भी ,
अब कम होने लगा हैं !
इस पाक रिश्ते में भी अब ,
फासले अधिक नज़र आते हैं !
आजकल के बेटे श्रवण बन जाए ,
ऐसा कहां होता है !
जहां देखी दौलत की चमक ,
मां-बाप का कत्ल कर जाते हैं !
इंसानों के बीच एक रिश्ता ,
होता है इंसानियत का !
इंसा अब इंसा रहे नहीं इसीलिए ,
इंसानियत का ख़ून कर जाते हैं !
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