Monday, November 2, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर,( छ. ग) 
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पुण्य धरा हरियाली भरी 
पंजाब की लगे भली-भली,
मेहनतकश कृषक बैलगाड़ी 
ले चल रहे गली-गली।

चारों ओर फसलें लहराई,
क्यारी लागे हली-भली,
खेतों के बीच कुछ
कच्चे मकान वृक्षों संग 
फसलें खड़ी-खड़ी।

बैलगाड़ी लिए श्वेत बैलों को 
साजे बाजे घण्टी रस से सनी-सनी,
यहाँ के नर-नारी स्वावलंबन 
की राह बढ़ चले सही-सही।

खेतों के बीच में कच्ची सड़कें
बन रही कुछ नयी-नयी,
ऊपर से धवल नभ झाँकता,
रविकर संग लिए कनी-कनी।

कृषि प्रधान देश मेरा,खेतों में 
जूझता किसान लगे हरि-हरि,
दिनरात मेहनत से फसल उगाएं
हरित-क्रांति के गुण से भरी-भरी।

आत्म-निर्भर देश बनाएं, 
नव सृजन के स्वप्न सजाएं अली-गली,
धानी चूनर संग धरती माँ लगती खिली-खिली।

हे श्रम सीकर! से नहाता 
धरती पुत्र नमन तुम्हें घड़ी-घड़ी,
तुमसे उम्मीद है इस जग को 
सदा बड़ी-बड़ी।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में पंजाब की हरी-भरी धरती,वहाँ के मेहनत कश किसानों एवं वहाँ की भूमि का वर्णन किया गया है।

     नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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