संबलपुर, जिला-कांकेर,( छ. ग)
~~~~~~~~~~~~~~~
पुण्य धरा हरियाली भरी
पंजाब की लगे भली-भली,
मेहनतकश कृषक बैलगाड़ी
ले चल रहे गली-गली।
चारों ओर फसलें लहराई,
क्यारी लागे हली-भली,
खेतों के बीच कुछ
कच्चे मकान वृक्षों संग
फसलें खड़ी-खड़ी।
बैलगाड़ी लिए श्वेत बैलों को
साजे बाजे घण्टी रस से सनी-सनी,
यहाँ के नर-नारी स्वावलंबन
की राह बढ़ चले सही-सही।
खेतों के बीच में कच्ची सड़कें
बन रही कुछ नयी-नयी,
ऊपर से धवल नभ झाँकता,
रविकर संग लिए कनी-कनी।
कृषि प्रधान देश मेरा,खेतों में
जूझता किसान लगे हरि-हरि,
दिनरात मेहनत से फसल उगाएं
हरित-क्रांति के गुण से भरी-भरी।
आत्म-निर्भर देश बनाएं,
नव सृजन के स्वप्न सजाएं अली-गली,
धानी चूनर संग धरती माँ लगती खिली-खिली।
हे श्रम सीकर! से नहाता
धरती पुत्र नमन तुम्हें घड़ी-घड़ी,
तुमसे उम्मीद है इस जग को
सदा बड़ी-बड़ी।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में पंजाब की हरी-भरी धरती,वहाँ के मेहनत कश किसानों एवं वहाँ की भूमि का वर्णन किया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
No comments:
Post a Comment