निवास-,बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक- "दीपावली पर्व " ।
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●●●||••दीपावली पर्व ••||●●●
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दीप से दीप जलायें--
लोगों में,अपनत्व का भाव जगायें ।
जग में,नेह का एक ऐसा---
दीप जलायें---
जो ,हर दिल में अपनेपन का,
हम,हक तो जता सकें --।
आओ,निराशा में आशाओं का--
ऐसा हम दीप जलायें,ताकि--
हर चुनौतियों का --
आसानी से,सामना करते जायें--।
देश के किसानों की--
बेजोड़ मेहनत का फल--
समय पर,अनाजों के बिकने से,
उनको मिल जाए,तभी--
दीपावली पर्व की खुशियाँ भी,
उनके परिवार को,मिल सकेगीं-।
दीपावली है,खुशियों का पर्व --
सबके घर-आँगन में--
खुशियां हैं,बिखेरता,
पर,हम तुम ,हर एक के चेहरे पर,
खुशियां लाने में---
आओ थोड़ी सी,मदद कर आयें--।
दीपावली के बहाने--
हो जाती,घर-बार की,साफ-सफाई,
पर,अन्तश की मलिनता को भी,
दूर करने,का भी ऐसा प्रयास करें,
इक जोत ,रोशनी का भी,जलायें--।
दीप-ज्योति की तरह---
सभी को,उज्ज्वलता मिलती रहे,
सबकी मंगलकामनाये पूरी हो--?
और देश में,सौहार्दपूर्ण वातावरण,
सदा बने रहे,इसके लिए--
समता व सम्मान की भावना को,
जन-जन में,रोशनी की तरह फैलायें-।
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व्याख्या--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि दीपावली पर्व सबके लिए खुशियां लेकर आया है और पर्व को मनाने में निर्धन परिवार की मदद करें ।
======14/11/2020=======
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