Friday, November 13, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- मुस्कान

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मुस्कान
विधा-कविता (मुक्त छंद)

नन्हें बच्चों की भोली सूरत में,
माँ की ममता भरी मूरत  में|
पेड़ों पर खिलते   उन फूलों में,
अक्सर दिखती है मुस्कान||

ये वह कुदरती बेशकीमती,
दौलत  है जो नहीं बिकती,
किसी भी बाजार के दुकान
और आलीशान महलों में||

अपनत्व,स्नेह,  बेफिक्री की
बगिया में किलकारी के बीच
महकता है मुस्कानों का इत्र
  नन्हें ओस की  बूंदों की तरह|

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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