जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मुस्कान
विधा-कविता (मुक्त छंद)
नन्हें बच्चों की भोली सूरत में,
माँ की ममता भरी मूरत में|
पेड़ों पर खिलते उन फूलों में,
अक्सर दिखती है मुस्कान||
ये वह कुदरती बेशकीमती,
दौलत है जो नहीं बिकती,
किसी भी बाजार के दुकान
और आलीशान महलों में||
अपनत्व,स्नेह, बेफिक्री की
बगिया में किलकारी के बीच
महकता है मुस्कानों का इत्र
नन्हें ओस की बूंदों की तरह|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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