Tuesday, November 24, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक कृत लघुकथा- बड़ा दिल

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा-लघु-कथा
शीर्षक -"बड़ा-दिल"
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एक बार की बात है कुछ लोग एक आदमी को दौड़ा रहे थे वह सड़क पर दौड़ रहा था तभी सामने से एक कार वाला, एक मोटरसाइकिल वाला, और एक साइकिल वाला आते  नजर आये वह आदमी दौड़ते -दौड़ते उस कार वाले को मदद के लिए आवाज दिया ,लेकिन वह कार वाला रुकना तो दूर आदमी पर अपनी नजरें भी ना डाली और वह चलता बना फिर वह आदमी मोटरसाइकिल की तरफ भागा और उसने उस आदमी से भी मदद मांगी लेकिन मोटरसाइकिल वाला पीछे आ रहे चार लोगों को देखकर घबरा गया और वह भी चलता बना । वह आदमी दौड़ता रहा अब उसकी शक्ति कम हो रही थी और वो आदमी उस तक पहुंचने ही वाले थे पर वह आदमी साइकिल वाले की तरफ नहीं गया  वह दौड़ता रहा तभी साइकिल वाले ने अपनी साइकिल स्टैंड की और वह उस दौड़ने वाले आदमी के सामने खड़े हो गया दोनों हाथ फैला कर उन दौड़ाने वाले चारों लोगों से जोर से आवाज में बोला अरे मूर्ख तुम लोग चार हो और यह  आदमी अकेला है तुम इसे क्यूँ दौड़ा रहे हो ? तब वे चारों उस साइकिल वाले आदमी को मारने के लिए आगे बढ़े तो उसने अपनी साइकिल से बंधी दूध की डिब्बे से उनकी खूब पिटाई की और उस आदमी की मदद की।तब भागने वाले आदमी ने कहा भाई मुझे माफ़ करना मैंने आपसे  मदद नहीं मांगी मुझे लगा शायद आप मेरी मदद करने में अक्षम है और मैंने आपसे मदद नहीं मांगी फिर भी आपने मेरी मदद की । मेरी सोंच बहुत गलत थी । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 
        तब वह दूध वाले ने कहा भैया कोई बात नहीं ये तो मेरा कर्तव्य था ।भले ही हम छोटे शहर के छोटे लोग हैं लेकिन बड़ा दिल रखते हैं ।आगे से आप छोटे शहर के लोगों के प्रति अपना जो दृष्टिकोण हैं इसे बदल दीजिए मेरी आपसे  विनम्र विनती है।

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