पता--------कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ------भाई - दूज
शीर्षक ---- यादें
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जब भी भाई - दूज का त्यौहार आता है , मेरे जेहन में उन दिनों की यादें ताजा हो जाती है ! जब मैं घर - परिवार से दूर अकेले रहकर शिक्षा अध्ययन कर रहा है । मेरे माता-पिता बचपन में ही मेरा साथ छोड़ दिए थे , मैं अपने भाईयों के स्नेह व सहयोग से पढ़ाई कर रहा था । हालांकि मेरी 5 बहनें हैं , लेकिन सभी बड़ी हैं और सभी अपने अपने ससुराल चली गई थीं । मैं बचपन से ही अलग रहा इसलिए बहनों का जो स्नेह - दुलार मिलना चाहिए था , नहीं मिल पाया । चूंकि मैं 10 भाई बहनों में सबसे छोटा हूं , और परिवार से दूर रहने के कारण भावुक प्रवृत्ति का हूं । अतः बहनों की कमी अक्सर खलती थी ।
मैं भिलाई में जहां रहकर पढ़ाई कर रहा था , वहीं पास के घर में साहू परिवार रहते थे । उस घर में दो लड़कियां थी , उम्र में एक मुझसे छोटी व एक मुझसे बड़ी थी । उनका कोई भाई नहीं था । मैं अक्सर उन दोनों को स्नेह की नजर से देखा करता था , लेकिन लड़कपन और यौवन का उम्र होने के कारण कुछ कहने से डरता था । चूंकि मैं सदा बहनों से दूर रहा हूं , इसलिए मुझे अपने निकट एक बहन की तलाश थी । रक्षाबंधन व भाई दूज के त्यौहार में मेरी उदासी किसी से नहीं छुपाई जा सकती थी ।
आखिर वो दिन आ ही गया जब मेरी अपनी मुराद पूरी हुई ! हुआ यूं कि भाई दूज का दिन था और वो दोनों बहनें एक थाल में आरती सजाकर मेरे पास आई और कहने लगी भैया आज भाई दूज है , हम आपको उदास नहीं देख सकते हमें अपना बहन मानकर आज के त्यौहार को खुशी खुशी मनाईये , मेरे मस्तक में तिलक लगा व आरती उतारकर भाई दूज के त्यौहार का रस्म अदा किये ।
इस तरह मुझे सन् 2003 में मुझे दो और बहनें मिल गईं । जो कि मेरे ही उम्र की होने के कारण हम अपने दिल की बातों को सहजता से कर लेते हैं ।
हालांकि कार्यक्षेत्र दूर होने के कारण अब लगातार भेंट नहीं हो पाती है लेकिन फोन व सोशल मीडिया के माध्यम से हमारा संबंध प्रगाढ़ है ।
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