स्थान- कचंदा
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा- कविता
विषय- दीपावली
शीर्षक- दीपावली का जोर
दीपावली का जोर
हर्षोल्लास व पटाखों का शोर है ।
दीपक, दीपक, दीपक चहुं ओर है ।
बच्चे, बुढ़े, जवानों सभी में है उमंग।
खुशी पर प्रमोद की उठी है तरंग।
मनोमस्तिष्क मस्ती से विभोर है ।
दीपक, दीपक, दीपक चहुं ओर है ।।
साल में आता एक बार दीप त्यौहार।
मौज-मस्ती व खुशियों की लाता बहार।
जागा खुशियों की एक नया हिलोर है ।
दीपक, दीपक, दीपक चहुं ओर है।।
कपट-कुत्सा को त्यागकर परस्पर करें प्यार ।
दीपावली देव की देन है रखें इसे बरकरार ।
द्वार-द्वार आँगन गली हर तरफ अंजोर है ।
दीपक, दीपक, दीपक चहुं ओर है ।।
ये दीपावली कभी न हो भंग ।
इसी तरह लाती रहे जीवन में उमंग ।
देश भर में आज दीपावली का जोर है ।
दीपक, दीपक, दीपक चहुं ओर है ।।
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