Saturday, November 14, 2020

जांजगीर-चांपा से संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- दीपावली

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-  कविता
विषय- दीपावली
शीर्षक- दीपावली का जोर

             दीपावली का जोर 

हर्षोल्लास व  पटाखों  का  शोर है ।
दीपक, दीपक, दीपक चहुं ओर है ।

बच्चे, बुढ़े, जवानों सभी में है उमंग।
खुशी  पर  प्रमोद  की  उठी है तरंग।
मनोमस्तिष्क   मस्ती  से  विभोर है ।
दीपक, दीपक,  दीपक चहुं ओर है ।।

साल में आता एक बार  दीप त्यौहार।
मौज-मस्ती व खुशियों की लाता बहार।
जागा खुशियों की एक नया हिलोर है ।
दीपक,  दीपक,  दीपक   चहुं  ओर है।।

कपट-कुत्सा को त्यागकर परस्पर करें प्यार ।
दीपावली देव की देन है रखें  इसे बरकरार ।
द्वार-द्वार आँगन   गली हर तरफ अंजोर है ।
दीपक, दीपक,   दीपक   चहुं    ओर है ।।

ये   दीपावली   कभी  न   हो भंग ।
इसी तरह लाती रहे जीवन में उमंग ।
देश भर में आज दीपावली का जोर है ।
दीपक, दीपक,  दीपक  चहुं ओर है ।।

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