निवासी:-कांकेर (छ.ग.)
विषय:-भाईदूज
शीर्षक:-भाई
विधा:-छंद मुक्त कविता
उस ऊपरवाले की शुक्रगुजार हूँ,
कुछ इस तरह मैंने उनकी कृपा पाई।
खून के रिश्ते में तो मिले ही मुझे भाई,
रूह और दिल के रिश्ते में भी मिले भाई।
मेरे भाइयों से मुझे ये है कहना,
इस रिश्ते को ऐसे ही दिल से निभाते रहना।
अच्छे बुरे वक्त में ऐसे ही मेरे साथ रहना,
एक इच्छा है जो है भगवान से कहना,
हर जन्म में बनाना मुझे मेरे भाइयों की बहना।
-कु.गरिमा पोयाम
कांकेर(छ. ग.)
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