स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय-- दीपावली
शीर्षक-दीपावली के दीप
दीपावली के दीप, तुम घर-घर जलना ।
मिटा अंधकार,सजाना सभी का सपना ।
तुमसे है सब की आशा,न हो अधूरा अभिलाषा ।
सभी लोग हैं एक समान, कोई बनने न पाए तमाशा ।
विनय है जगमग कर देना,हर घर का अंगना ।
खुशियां तुम लेकर आते,धन ,धान्य, समृद्धि ।
तुम्हारा आना सबके सुखों में,कर जाता है वृद्धि ।
इसलिए लोग तुम्हारे करते, खूब पूजा वंदना ।
तुम्हारे कारण खरीददारी का, दुनियां में प्रचलन है ।
सोना, चांदी ,जेवरात, वाहन खरीदते, यहां जन जन है ।
बांटते आपस में बधाई,खुश रहो मंगल रहो लोगों का कहना
घर- घर बनती मिठाईयां,घर- घर फूटते जोरदार पटाखे ।
बम ,सुरसुरी, अनार जलाकर, उत्सव तुम्हारा मनाते ।
तुमसे हर्ष मय लगता जीवन, ऐसे ही हरदम रखना ।
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