Friday, November 20, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- कागज़ की कश्ती

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग छ.ग.
विधा - मुक्त
शीर्षक -    
        *कागज की कश्ती*

आधुनिकता की चकाचौंध
 सोशल मीडिया का दौर
मोबाईल खेल के जुनून में
डूबा आज का  बचपन,
मासूम आँखों में मोटे चश्में,
किताबों के बोझ से झुके कंधे
प्रतिस्पर्धा की होड़ मे कुंद होता मन मस्तिष्क और
दिखावटी लोगों की ये बस्ती..

आज भी वही बारिश है वही
बहता पानी है लेकिन गुम है
बस बेफिक्र बचपन की मस्ती
वो कागज की कश्ती ।।

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