निवास-बैरन-बाज़ार,रायपुर,छत्तीसगढ़
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक--""सफलता "" ।
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♧▪||••"सफलता "••||▪♧
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सफलता की सीढ़ी चढ़ना---
कोई आसान काम नहीं है,
करनी होता,दिन-रात परिश्रम,
लक्ष्य बनाकर चलना होता ,
सुनियोजित योजना के साथ--।
सफलता पाने का सबक---
मन में,उठती पहली सोच से है,
और उस राह पर,चल पड़ने में,
रखा हुआ,पहला कदम है--।
कहा भी गया है कि---
"सफलता परिश्रम की कुँजी है।"
एक चीटी का,दाना लेकर चलना,
एक बाज का,अपने शिकार पर,
तेजी के साथ झपटा मारना और--
अपनी गिरफ्त में ले लेना--।
सफल व्यक्तियों के पीछे---
कुछ--न--कुछ असफलता की--
कहानी व घटनाओं का,राज होता है,
थामस एडिशन,इसके एक--
बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं--।
"गीता " के मतानुसार---
"कर्म किये जा,फल की चिंता मत करो
ऐसे ही,सफलता पाने के लिए भी,
सिर्फ धैर्य व लगन के साथ--
अपनी,मंजिल की ओर देखकर,
सम्हलकर चलना होता है--।
वैसे,हर काम,सफलता के लिए--
कभी,नहीं किया जाता है,
वो तो,आपकी दिनचर्या का एक हिस्सा होता है और उसे--
नि:स्वार्थ भाव से ही--
पूरा करना होता है--।
सफलता का सफ़र - - -
होता है,दोस्तों--हमेशा,
चुनौतियों से भरा होता,
सिर्फ उसे ही,सफलता का फल मिलता,जो जोखिम व साहस को,
अपने में,सदा संजोकर है रखता--।
हर खेल में,जीत-हार---
प्रतिस्पर्धा का,अभिन्न अंग है,
पर,उस वक्त,जो सफल हो जाता,
वही सिकंदर कहलाता है--।
आज विश्वस्तरीय गलाकाट प्रतिस्पर्धा,
और जी--तोड़ मेहनत ने--
मानव को,मशीन बना दिया है ।
पर,कुशल नेतृत्व व बेहतर प्रबंध-
व्यवस्था ही,उसकी सफलता का,
एक नया,आयाम गढ़ती है--।
सफलता पाने की भूख में---
किसी को ,तुम गिरा मत देना,
और न कोई साजिश करना,
ना कोई गद्दारी की व्युहरचना करना,
यदि सफलता मिल भी जाए तो,
उसके साथ,लगा होता ,अक्सर--
एक बदनुमा दाग भी --।
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व्याख्या:-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि सफलता तो कठिन परिश्रम से ही मिलती है और इसके लिए उचित प्रयास करने होतें हैं ।
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