निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विधा-कविता मुक्त ।
शीर्षक- महाद्वीप ।
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○○●●|| महाद्वीप ||●●○○
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सत खण्ड धरती---
सात समंदर व महाद्वीप,
प्रकृति के सशक्त प्रतिमान हैं ।
इक भारत उसमें--
प्रायद्वीप का भूभाग है,
तीन मौसम,तिरंगा झण्डा,
है,इसकी खूबसूरत शान है ।
ओलंपिक खेलों के---
झण्डे में,अंकित छल्ले ही,
महाद्वीप का,प्रतिनिधित्व और
इसकी पहचान है ।
हर महाद्वीप की पहचान--
उसकी भौगोलिक स्थिति,
जनसँख्या,रहन-सहन भी,
एक दूसरे से,अलग करती है ।
बस दुनिया को जोड़ रखा है--
कई संगठन व संस्थाओं ने,
विषय-वस्तु व उद्देश्य से ही,
आपस में,एक दूसरे को,
यही बुनियादी तौर पर सच है ।
रियासत-सियासत ने--
जाति-धर्म व वर्चस्व की भूख ने,
महाद्वीपीय हलचल पैदा कर दिया है,
कभी विकास व कभी विनाश,
के साये ,हमेशा मंडराते रहते हैं ।
सारी दुनिया को,अपनी मुठ्ठी में,
कैद कर लिया है--
विज्ञान के चमत्कार व संचार क्रांति ने,
धरती व गगन पर भी,हक अपना,
जता रहे हैं और मानवों को,
संशयों से,भयभीत कर रहे हैं ।
आओ सारे महाद्वीप में--
अमनों शांति व भाईचारे का भाव रहे,
ऐसा इक प्रयास,ऐसा करम करें,
इस संदेश को,पूरी दुनिया में फैलायें ।
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व्याख्या---उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति के लिए महाद्वीपीय शांति का पैगाम लेकर आया है ।
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