Wednesday, November 11, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- महाद्वीप

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ. ग.)
          विषय-महाद्वीप
         दिनाँक-11.11.20
      
            *महाद्वीप*

महाद्वीप और महासागरों
       से रसा बसा यह संसार,
उन्तीस प्रतिशत महाद्वीप,       
      इकहत्तर प्रतिशत में महासागर अपार।

सब महाद्वीपों में एक 
       एशिया है कहलाता,
जिसमें भारतदेश अपना 
     गरिमा मय स्थान बनाता।

सभ्यता जहाँ पहले पनपी,
       विश्व गुरु था कहलाता,
नालन्दा,तक्षशिला, बनारस
        यह इतिहास बताता।

हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख,
      ईसाई सबसे है यहाँ नाता,
रंग-रूप,वेशभूषा,जाति, 
       धर्म में कोई भेद ना पाता।

मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा,
         गिरजाघर है यहाँ प्यारा,
गंगा जमुना कृष्णा,
        कावेरी की बहती धारा।

नदी,पहाड़,पठार,मैदानों 
     संग हिमालय रक्षक कहलाता,
तीन ओर सागर से घिरा
‌‌       यह देश स्वर्णिम बन जाता।

पृथ्वीराज, राणा प्रताप,झाँसी 
      की रानी,शिवाजी का बताता,
संस्कार,संस्कृति, यहाँ का 
       पूरे विश्व को है भाता।

विश्व बंधुत्व,वसुधैव 
     कुटुम्बकम का है यहाँ 
से अटूट नाता,सारे महाद्वीपों 
        में एशिया का भारत संसार का तीर्थ कहाता।

*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में सारे  महाद्वीपों में एशिया महाद्वीप के भारत देश के बारे में बताया गया है।
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       नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर, कांकेर,(छ .ग.)

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