Tuesday, November 17, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- आदमी

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
      संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ.ग.)
            विषय-आदमी
        दिनाँक-17.11.20
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                 *आदमी*
आदमी आज 
आदमियत है खो रहा ,
हैवानियत का खुला 
नंगा नाच है हो रहा।

सारे रिश्ते-नाते यहाँ 
दम है तोड़ रहे,
त्याग,समर्पण, प्रेम,सौहार्द्र 
सब खड़े रो रहे।

आदमी स्वंय से 
अंजान यहाँ  हो रहा,
सारे मानवीय भाव 
यहाँ से रुखसत हो रहा।

भौतिकता के नाम पर 
आदमी चाँद पर पहुँच गया,
नैतिकता और मानवीय 
मूल्य गर्त में खो गया।

आओ फिर संबंधो को 
पुनर्जीवित करें,
दुःख,सन्ताप,पीड़ा को 
अपनों से दूर करें।

जीवन के सकारात्मक 
दृष्टिकोणों को नया आयाम मिले,
सृजनात्मक हो हर सपना 
सबको नया सोपान मिले।

 *व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में आदमी 
अपनी नैतिक मूल्यों को भूल गया है।मानवीय मूल्यों का अवमूल्यन हो रहा है।

      नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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