Sunday, November 1, 2020

जांजगीर-चांपा से अनिल कुमार की रचना- समय

रचनाकार   :- अनिल कुमार
जिला        :- जांजगीर-चाम्पा 
राज्य         :- छत्तीसगढ़ 
शीर्षक       :- समय
विधा         :- कविता
..............................

              // समय //

समय निरंतर, 
बदलता रहता है। 
पर अपना समय, 
स्वयं बदलना पड़ता है। 
दुनिया की इस भीड़ मे, 
अकेला चलना पड़ता है। 

हालात के साथ, 
मजबूरियों को मत कोशो।
वक्त के साथ, 
चलना सीखो। 
वक़्त यूँ ही कट जायेगा, 
फिर ये मंज़र याद आएगा। 
जी लो इस पल को, 
क्या पता वक़्त, 
कल कहाँ ले जायेगा।

कहीं धुप तो, 
कहीं छाया है। 
वक़्त के पीछे, 
रह गये तो निराशा है। 
सपना रात में नहीं,
दिन में देखो, 
समय के साथ चलना सीखो। 

समय किसी के लिए, 
कभी रुका नहीं। 
समय के साथ जो चला, 
वो कभी झुका नहीं । 
वक्त-ए-सफ़र पर चलना है, 
समय का सदुपयोग कर,
मंज़िल को प्राप्त करना है। 

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~ अनिल कुमार यादव 
    जांजगीर चाम्पा छ.ग.

23 comments:

  1. अति सुंदर 🙏👌👍

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  2. समय किसी के लिए,
    कभी रुका नहीं।
    समय के साथ जो चला,
    वो कभी झुका नहीं ।
    👌👌👌

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  3. बहुत अच्छा सर जी।

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  4. वक्त-ए-सफ़र पर चलना है,
    समय का सदुपयोग कर,
    मंज़िल को प्राप्त करना है।
    👏👌✍️

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  5. Very nice ����

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  6. Samay par meri ak chhoti si bat hai, Kahi din hai to kahi rat hai, par mujhe aisa lagta hai, dharashiw ki mitti me jarur koi khash bat hai, Kahi din hai to kahi rat hai

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  7. Samay par meri ak chhoti si bat hai, Kahi din hai to kahi rat hai, par mujhe aisa lagta hai, dharashiw ki mitti me jarur koi khash bat hai, samay par meri ak chhoti si bat

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