निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-""छोटा शहर "" ।
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""••||••छोटा शहर ••||••""
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गाँव जब कस्बा बना ---
और कस्बा एक छोटा शहर बना ,
फिर लोगों की,जीवन शैली बदली ।
छोटा शहर बना ,नगर पंचायत---
फिर,सुख-सुविधाओं में,विस्तार हुआ,
कच्ची गलियाँ,बनी सीमेन्ट की,
नालियोँ का,विस्तार भी हुआ ,और--
कुछ हद तक,गन्दगी भी बढ़ी --।
मौहल्ला,फिर वार्ड बनें ---
और उसका एक प्रतिनिधि बना ,
समस्या व सुधार की गुहार लगी ,
बुनयादी सुविधाएँ भी बढ़ी ,
बेहतर हुई ,जीवन शैली भी--।
आबादी का,फिर विस्तार हुआ--
और धीरे से प्रदूषण भी बढ़ा ,
हाट-बाजार में,रौनक दिखने लगी,
छोटा शहर की,अपनी खासियत बढ़ी,
नजदीक दूरी में ही,सुविधाएँ बढ़ी ।
शिक्षा का भी विस्तार हुआ---
अस्पताल में भी,सुविधा बढ़ी ,
अपरिचितों की भी संख्या बढ़ी ,
भाईचारा में भी,कुछ कमी आयी -।
छोटा शहर,बड़े शहरों से जुड़ने लगा,
फिर यातायात की,सुविधाएँ भी बढ़ी,
प्रशासनिक सेवायें उपलब्ध हुई ,
संचार माध्यमों में भी बढ़ोतरी हुई ।
कच्चे मकान,पक्के हुई --
बिजली की सुविधाएँ बढ़ी,
शहर की चमक-दमक बढ़ी ,
सियासती गहमा-गहमी भी बढ़ी,
फिर छोटे-शहर की,पहचान बढ़ी ।
लोग सोचते रह गये---
ये कैसा परिवर्तन आया,
स्थानीय लोग पिछड़ते गये,
बाहरी लोग,राजनीति करते रहे,
वहाँ के लोग,सिर्फ जनता ही रहे--।
फिर भी,है मेरा छोटा शहर---
हर सुख-सुविधा को पूरा कर रहा,
हर काम में,समय की बचत हुईं,
और समस्याओं का हल होता रहा,
इसलिए आसपास के कस्बों का,
यह एक मुख्य केंद्र हो गया --
आओ हम तुम,अपने-अपने--
छोटे शहर को,अपना बनायें ,
प्रदूषण मुक्त,स्वच्छ बनायें ,
और विकास में आगे बढ़ते जायें ।
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व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि छोटा शहर में सारी सुविधाएँ समीप स्थित होती हैं ।जबकि कुछ अत्याधुनिक सुविधाओं की कमी भी हो सकती है ।
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