Tuesday, November 24, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- छोटा शहर

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - मुक्त कविता 
   शीर्षक - " छोटा शहर ऐसा हो "
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छोटा शहर भले ही मेरा हो। 
ताजगी हवा से शुरू सवेरा हो। 
है ख्वाहिश ऐसे ही शहर की, 
जहाँ सभी प्रिय बंधु-भाई मेरा हो।। 

प्रदूषण का जहाँ न संकट हो। 
पानी की जहाँ न कोई झंझट हो।
नल से पहुँचे शुध्द जल हर घर, 
हर समस्या का निराकरण जहाँ झटपट हो।। 

नाली की समय पर सफाई हो। 
बीच-बीच में दवा छिड़काई हो। 
हर गली-मोहल्ला हो स्वच्छ, 
जागरुक मेरा हर बहन-भाई हो।। 

आवागमन का उचित साधन हो। 
महिलाओं हेतू महिला प्रसाधन हो। 
न हो असुरक्षित औरत कभी, 
रात्रि में ऐसी सुरक्षा व्यवस्थापन हो।। 

ईमानदार कानून का रखवाल हो। 
हर बेटी-बहू के आबरु का देखभाल हो। 
न जाये जान किसी भी बेटी की, 
सिर उठा चल सके ऐसा माहौल हो तो कमाल हो।। 

शहर में ऐसा अस्पताल हो। 
आपातकल पर इलाज तत्काल हो। 
औपचारिकता न बने जान का दुश्मन, 
किसी गरीब मरीज का न कभी काल हो।। 

पक्का सबका मकान हो। 
उपलब्ध सभी को परिधान हो। 
न दिखे कोई भूख से तड़पता, 
हर व्यापारी के कार्य का सम्मान हो।। 

हकीकत मेरा यह सपना हो। 
विकास शहर का अपना हो। 
मिले हर सुख-सुविधा यहाँ, 
उन्नति ही शहर का गहना हो।। 

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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