स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर-चाम्पा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता मुक्त
शीर्षक-जिन्दगी बदल जाए
सोचता हूं जिन्दगी,बदल जाए ।
जो आज है,वो न कल आए ।
थक चुका हूं मैं,दुख उठाते हुए ।
आंसू पग-पग पर, बहाते हुए ।
हंसना अब चाहूं, रोना टल जाए ।
दिन रात है ठोकर, पाऊं आराम ।
सुबह बीत चुका, अब बचा है शाम ।
जन्म लेना ही मुझको ,न खल जाए ।
चाहूं रहना चैन से, निश्चिंत होकर ।
मेरा भी नाम हो, पाकर खोकर ।
न कोई अब मुझे,छल जाए ।
पहले सोच बदलो, मैंने सुना था ।
इसलिए यह राह, मैंने चुना था ।
पहले असफलता, फिर सफल आए ।
No comments:
Post a Comment