निवास--बैरन बाजार ,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा- छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक--" आम आदमी " ।
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¤¤¤||••आम आदमी ••||¤¤¤
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आदमी आम न --
कभी खास होता है ।
उसकी अहमियत व कारनामें,
बना देतें हैं,उसे खास --।
वक़्त के साथ ही---
आदमी ने ,बदल दी है,
अपनी अपनी जीवन शैली,
पूरी दुनिया को सिमट लिया है,
आज अपनी मुट्ठी में--।
आवश्यकता आविष्कार की जननी है-
आदमी,इस सृष्टि का बुध्दिमान जीव है
जीने के लिए,कर लिया,उसने खोज,
हर एक,आवश्यक चीजों का--।
विश्व पटल पर--
भौगोलिकता कैसी भी हो,
आदमी से आदमी--
जुड़ ही गया है,और--
एक--दूसरे के साथ,वह जीना,
सीख ही जाता है--।
आदमी और जानवर के बीच--
सिर्फ फ़र्क है इतना--
ये दो पैरों से है चलता और--
वो चार पैरों से है,चलता-फिरता,
और तो,अपने विवेक से--
अपनी बात को,कहता है--।
आदतें आदमी की,पहचान हैं--
जो ,सामाजिकता में,ढल जाता है,
और नैतिकता का,सदा पालन करता,
वही सम्मान का,असली हकदार बनता।
आदमी का आडम्बर ही,
ले डूबता ,सदा ही उसको --
यदि उसे,शोहरत मिल भी जाए तो,
पर,वो,दे पाता न औरों को खुशी--।
हौंसला आदमी की अक्सर--
उसकी तकदीर बदल देते हैं,
शिक्षा व ज्ञान उसमें--
खुशियों का,सुनहरा रंग भर देते हैं--।
आदमी में,हो इंसानियत तो--
वह,सबका चहेता बन जाता है,
और अपनी हुनरमंदी कारनामे से,
इतिहास को,बदल देता है--।
आम आदमी को---
इस सँसार में जीना--
उतना आसान भी नहीं है--
पर ,हो जिसमें अक्लमंदी,
वह,हर हाल में,जी ही,लेता है--।
=====इति ==============
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