Tuesday, November 17, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- आदमी

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-आदमी
विधा-कविता( मुक्त छंद)

आदमी अब आदमी नहीं रहा
चेहरे पर जाने कितने मुखौटे ।

आदर्शों का लिबास ओढ़ जीता,
आदर्शों का मुखौटा ओढ़ मरता

धन लोलुपता,भौतिकता की चाह,
धर्म की आड़ ले चलता गलत राह

इंसान को अब पहचाने भी कैसे गिरगिट की तरह रंग बदलता है

आदमी लोगों के काम आना छोड़
अपने मुंह मिट्ठू मिया बनता है ।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...