जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - मुक्त कविता
शीर्षक - " बेमौसम बरसात "
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का बताऔं मैं तोला भगवान।
कर दे न मोर भारी नुकसान।।
फसल के मिट गिस नामों निशान।
ले डार अब मोरो तैं परान।।
जे घानी गिराना रहिस नई गिराय पानी ल।
अब संकट म ला दे किसान के जिंदगानी ल।।
पानी म बुड़ गिस खेत के मोर जम्मों धान।
का बताऔं मैं तोला भगवान।।
रांपा-गैंती म रोज मुही ल फोरत हंव।
लइका बरोबर मोर धान ल पोसत हंव।।
का संझा का बिहान।
का बताऔं मैं तोला भगवान।।
आनी-बानी के रोग-मांदी ह आगिस।
लहरावत फसल ल सब कीरा ह खागिस।।
पकरा गे हरियर सब पान।
का बताऔं मैं तोला भगवान।।
सुन ले मोर गोहार, मोर कलपना ल।
मत उजाड़ जिंदगी के मोर सपना ल।।
दया कर दे मोर करुणानिधान।
समस्या के तैं कर दे समाधान।
का बताऔं मैं तोला भगवान।।
का बताऔं मैं तोला भगवान।।
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मौलिक रचना (स्वरचित)
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
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