जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - भक्ति
विधा - कविता
छंद - वर्णिक छंद
शीर्षक - भक्ति के पद
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// भक्ति के पद //
मनभावन मोहन बाँसुरिया जमुना तट तान अलापत है ।
सखियाँ मन मोद बिहार करै मुस्कान मनोहर लागत है ।
मुरली धुन कर्ण परे सहसा उठि धावहिं ढूंढत झाँकत है ।
तरु डाल छिपे सब खेल लखे हरि नाटक नृत्य रिझावत है ।।1।।
सियराम भजो नर जीवन दो दिन का पथ संकट घातक है ।
पल माँहि नशाय सभी कुछ रे अभिमान बड़ा तव पातक है ।
हरिनाम सदा सुखदायक जो भव सागर का दृढ़ तारक है ।
हिय सोच विचार जरा पगले फिर तर्क वितर्क कुबात कहै ।।2।।
किसने नव पल्लव रंग रँगे फल फूल लता मन भावन है ।
वन बाग नदी तट सुन्दर दृश्य मनोहर रम्य सुहावन है ।
बरसे जल धार धरा नभ से जग जीवन अमृत पावन है ।
सब जीव चराचर आपस के खुशियाँ किसके हित कारण हैं ।।3।।
ईश्वर की महिमा अति अद्भुत वेद पुराण थके गुण गाते ।
नारद व्यास वशिष्ठ सभी ऋषि संतन पार नहीं प्रभु पाते ।
शारद शेष गणेश सदा गुण गावत अंत कभी नहिं आते ।
कौन सके महिमा गुणगान भजो नित केवल गोविन्द राधे ।।4।।
मालिक सर्व प्रधान प्रभो ! जय हो जय बारहिं बार विधाता ।
विश्व चराचर आप रचे सब एक कहात परस्पर भ्राता ।
भाग विभाग अखण्ड बँधे अति मोहक चित्र सुहावत नाता ।
अद्भुत सृष्टि न जाय बखानत केवल आपहिं आप समाता ।।5।।
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