जिला:-कांकेर(छ. ग.)
विषय:-छोटा शहर
शीर्षक:-मैं गुजरी उस कस्बे से
विधा:-छंद मुक्त कविता
हाल ही में गुजरी उस कस्बे से,
जहाँ मेरा बचपन बीता था।
हाँ वही कस्बा,
जो शहर बन चुका था।
कुछ-कुछ पूरा नहीं,
गलियाँ वैसी थी,
सड़क वैसा था,
बस मेरा कस्बा
थोड़ा शहर बन चुका था।
बचपन की यादें ताजा हो गई,
मैं उन यादों में खो गई।
वो घर,आंगन वहीं था,
मकान मालिक ने तोड़ा नहीं था।
नई इमारतें बन गई थी,
हैण्डपम्प पुराना गायब था,
वो कस्बा कहीं खो गया था।
वो सेतु भी वहीं था,
जहाँ पापा घुमाने लाते थे।
पानी थोड़ा सूख चुका था,
जिससे हम खेल आते थे।
हम जल्दी में थे,
गाड़ी में थे।
सो उस जमीं पर पैर न रख पाई,
तसल्ली है,
उस जमीं को देख आई।
-कु.गरिमा पोयाम
कांकेर (छ. ग.)
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