निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला--रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा-कविता,मुक्त छंद ।
शीर्षक:-संदेश ।
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●●●|||•संदेश •|||●●●
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कृष्ण की माखनचोरी---
मात्र एक ठिठोली नहीं,
श्याम की बंशी धुन,
मात्र,गोपियों की जीवन राह नहीं ।
केशव का प्रदत्त ज्ञान---
अर्जुन की,सम्पूर्ण--
जीत का,वरदान नहीं ।
जमीन का,बँटवारा-विवाद---
मात्र,पाण्डवों की सच्ची,
राजगद्दी तो नहीं ।
गीता का,उपदेश--
मात्र,मूर्खों की,
नई दिशा भी नहीं ।
सोचा है,कभी तुमने---
जैसा शब्द-अर्थ दिखता है,
वैसा,हरगिज़ तो नहीं ।
आओ मंथन-चिंतन करें---
मूक बने रहना भी,
कोई बुध्दिमानी तो नहीं ।
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व्याख्या--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि महाभारत का युद्ध से सबक क्या मिलती है,चिंतन करने की जरूरत है ।
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