Wednesday, November 18, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- भ्रष्टाचार की राजधानी

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-भ्रष्टाचार की राजधानी
विधा-कविता (मुक्त छंद)

अमन  चैन और सादगी की धानी,
हमारी छत्तीसगढ़ की राजधानी।
मानवता रगो में  हमेशा बसती,
जिसका गुणगान नदियाँ करती ।

करोना के कहर से सब बदला,
आलू,प्याज का दाम  कड़का,
जमाखोरी , बढ़ती घरेलू  हिंसा ,
डकैती,चोरी का प्रकरण बढ़ता ।

इंसानियत अब ताक में रखकर,
कीमतें आसमान को छूने लगी,
डर है कि संस्कारों की धानी,
भ्रष्टाचार की राजधानी न बने।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग

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