जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-भ्रष्टाचार की राजधानी
विधा-कविता (मुक्त छंद)
अमन चैन और सादगी की धानी,
हमारी छत्तीसगढ़ की राजधानी।
मानवता रगो में हमेशा बसती,
जिसका गुणगान नदियाँ करती ।
करोना के कहर से सब बदला,
आलू,प्याज का दाम कड़का,
जमाखोरी , बढ़ती घरेलू हिंसा ,
डकैती,चोरी का प्रकरण बढ़ता ।
इंसानियत अब ताक में रखकर,
कीमतें आसमान को छूने लगी,
डर है कि संस्कारों की धानी,
भ्रष्टाचार की राजधानी न बने।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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