Sunday, November 1, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- वफ़ा-ए-जिन्दगी

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- ग़ज़ल
शीर्षक -"वफ़ा-ए-ज़िन्दगी"
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जिसके आंखों में, शर्म और दिल में ख़ुद्दारी  नहीं 
आजकल  जीने  में  उसको,  कोई  दुश्वारी  नहीं ।

मुल्क के हालात, बिगड़ते जा रहें हैं दिन-ब-दिन 
और आवाम कह रही है कोविड-19 बीमारी नहीं ।

आग सीने में भरी हो, यह  तो  अच्छी  बात  है 
कूद  जाना आग  में , कोई  समझदारी तो  नहीं ।

हमने ऐसे सूरमा तो ,आज तलक नहीं देखे हैं
जंग लड़ने चल दिए ,और  कोई  तैयारी  नहीं  ।

खुद से लड़ते रहे ,फिर भी आज तक जिंदा हैं
जाने कितना हौसला है ,जिंदगी कभी हारी नहीं ।

चेहरे  में  चमक  भी  है,  दरिया  दिल  भी  है 
उसमें  सारी  खूबियां  हैं,  पर  वफ़ादारी  नहीं  ।

इसलिए 'पुष्पा ' शामिल, हो  नहीं  पाई  भीड़ में 
उसमें  फनकारी  तो है , लेकिन  अदाकारी नहीं ।

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