Saturday, October 10, 2020

गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न" की रचना- पतझड़

रचनाकार-गुलशन खम्हारी"प्रद्युम्न"
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विषय/शीर्षक _पतझड़

**************************
जीवन में डालों सी लचक चाहिए,
खिलती कलियों सी महक चाहिए ।
जीवन का गुलदस्ता यूॅं ही नहीं महकता,
हर मुस्कुराहट को जरा कसक चाहिए ।।

सब्र में बसंत की बहार झूम कर आएगी,
धरती की चरण बादल चूम कर आएगी ।
दुखों को लबों में सजाए रखना,
खुशियों की गलियाॅं तुम तक घूमकर आएगी ।।

रेगिस्तान में नागफनियॉं भी खिला करती हैं,
छद्म मरीचिकाऐं वहाॅं सहज ही मिला करती हैं ।
लू के थपेड़ों को संभाले रखना,
इनसे भी तो पत्तियाॅं हिला करती हैं ।।

संभाले पुष्प अब बिखरने लगे हैं,
जड़ों संग तना सिहरने लगे हैं ।
किसकी दुआएं काम कर रही हैं,
पतझड़ में भी पत्तियाॅं निखरने लगी हैं ।।

खुशियों के पत्ते झरने लगे हैं,
तना-फल-फूल सब मरने लगे हैं ।
ये फल मुझसे ही टूटकर गिरा था,
बीज अंकुरित हो फिर सॅंवरने लगे हैं ।।

**************************
स्वरचित मौलिक रचना
गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न
रायगढ़ छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...