जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-छत्तीसगढ़ी का गद्य: एक परिचय
विधा- आलेख
भाषा के विकास में गद्य साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है|
छत्तीसगढ़ का गद्य साहित्य भी निरंतर पुष्ट हो रहा है|इसके प्रमाण में छत्तीसगढ़ का प्रथम उपन्यास ' हीरु के कहिनी' ,जिसे पंडित वंशीधर पांडेय ने लिखा है|
पंडित लोचन प्रसाद पांडेय छत्तीसगढ़ी गद्य लेखन परम्परा के संस्थापक माने जाते हैं|इसके द्वारा लिखित नाटक 'कलिकाल'(1905 ई.) को छत्तीसगढ़ी का प्रथम नाटक माना गया है|छत्तीसगढ़ी की प्रथम कहानी 'सुरही गइया' के लेखक पंडित सीता राम मिश्र हैं|प्रथम छत्तीसगढ़ी व्याकरण सन् 1880 में काव्योपाध्याय हीरालाल ने लिखा|
छत्तीसगढ़ी में व्यंग्य लेखन का प्रारंभ शरद कोठारी की रचनाओं से माना जाता है|छत्तीसगढ़ी में प्रथम समीक्षात्मक रचना डॉ. विनय कुमार पाठक की 'साहित्य अऊ साहित्य कार है|माधवराव सप्रे की कहानी टोकरी भर मिट्टी काफी चर्चित रही|
छत्तीसगढ़ी गद्य लेखन में श्याम लाल चतुर्वेदी,नारायण लाल परमार,जीवन यदु आदि की महत्वपूर्ण भूमिका है| छत्तीसगढ़ी गद्य के विकास में माधव राव सप्रे,बलदेव प्रसाद मिश्र,कोदूराम दलित की महत्वपूर्ण भूमिका है|
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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संदर्भित ग्रंथ-छत्तीसगढ़ का सामान्य ज्ञान:रमेश चन्द्र देवांगन
एवं अन्य संकलन|
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