Wednesday, October 28, 2020

जांजगीर चांपा से गिरधारी लाल चौहान कृत आलेख- छत्तीसगढ़ी गद्य

नाम-गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा---आलेख
विषय-छत्तीसगढी का गद्य
     हमारी जो भाषा छत्तीसगढ़ी है उसके लेखन में गद्यों पद्यों का विकास कब से प्रारंभ हुआ सबसे पहले हमारी जो भाषा थी किस रुप में लिखी गई और वर्तमान में जिस रुप में लिखा जा रहा है जमीन आसमान का अंतर है कोई भी लेखक या कवि सिर्फ प्रमाणिकता के आधार पर ही यह सिद्ध कर रहा है कि बिते कालों में इस प्रकार से लिखा गया । मेरे लिखने का आधार भी वही है लेखकों कवियों के द्वारा लिखित रचनाएं हमारे स्वप्रमाण है कई संगोष्ठी एवं लेखकों कवियों के सम्मेलन में उनके द्वारा सीखने की विधाओं परिचर्चाओं में  सुनने भाग लेने उनके वक्तव्यों से जो ज्ञात हुआ है कुछ बातें हैं लिखा जा रहा है छत्तीसगढ़ में भाषा का विकास ईसापूर्व छठी शताब्दी से माना गया है क्योंकि मागधी प्राकृतिक भाषा पूर्वी दिशा में और शौरसेनी प्राकृति के शिलालेख उत्तर पश्चिम दिशा में मिलते हैं ।इन्ही भाषा से छत्तीसगढ़ी भाषा का विकास हुआ ।भाषा पर आदिवासियों की बोली का भी प्रभाव है इसे लगभग 1000वर्षसे पहले शुरुआत माना गया है ।
डा.नरेन्द्र देव वर्मा के द्वारा कुछ कालक्रम विभक्त किया गया है
1.गाथायुग---1000से1500
2.भक्ति युग----1500से1900
3.आधुनिकयुग----1900से आज तक ।
गाथा युग में विभिन्न रचनाएं हुई ये रचनाएं प्रेम और वीरता पर आधारित है पीढ़ी दर पीढ़ी चली यह लिपि बद्ध परम्परा नहीं थी मौखिक थी आधुनिक युग में लिपि बद्ध किया गया है इन गाथाओं में केवला रानी,अहिमन रानी, रेवा रानी,राजा वीर सिंह की गाथाएं प्रमुख हैं इसमें फूलवासन और पण्डवानीआतेहै जोप्रचलित है ।

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