स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- आलेख
शीर्षक -"पखेरू आशियाना "
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जीवन को सही दिशा और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते पंछियों से हमें सीखना चाहिए। पंछी अपने उड़ानों के लिए जाने जाते हैं। ईश्वर की दी हुई विशेष कृति पँखो से पहचाने जाते हैं।
पखेरू मानविय समाज को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित ही नहीं करते बल्की लगन और मेहनत से अपने लक्ष्य तक पहुंचने का संदेश भी देते हैं । चिड़िया का घोंसला देखने मे भले मामूली लगे ,पर इसकी महत्ता एक चिड़िया का ह्रदय रख कर सोचने में समझ में आती है। चिड़िया का घोंसला उसका आशियाना होता है । उसके बच्चों के लिए परवरिश का आधार होता है ।
बया पक्षी को ही देखें बच्चों के लिए समर्पित होकर घोंसला बनाने का जुनून उसे एक उच्च कोटि का कलाकार बना देता है , जो अपने आप में एक आश्चर्यजनक बात है । पक्षी अपने कार्यों को पूरी लगन और मेहनत से करते हैं और इनके बीच क्रोध ,अहम, हिंसा जैसी बातों के लिए कोई जगह नहीं। इनकी यही खास बात उन्हें अन्य प्राणियों से अलग करती है ।
बच्चों को जन्म देकर उसका पालन पोषण करना संसार का हर प्राणी करता है । बच्चों को सही रास्ता दिखाता है । अपने बच्चों के लिए सही दिशा चुनना एक जनक का कर्तव्य होता है । अगर हम पक्षियों को देखें तो तिनका तिनका जोड़ कर नन्ही सी चिड़िया घोंसला बनाती है । उसका कार्य निहायत ही बेजोड़ है क्यूंकि बिना हाथों के वह तिनका - तिनका जोड़ लगन और मेहनत से घोंसला बनाती है ,अंडे सेती है जब वह थोड़े बड़े होते हैं तो उन्हें अपने हुनर बड़ी ही चतुराई से सिखाती है ,और फिर से नये घोसले और नए पीढ़ी के विकास की तैयारी में जुट जाती है ।
उसे अपनी पिछले जीवन की परछाइयों से कोई सरोकार नहीं वो हमेशा आगे देखती है और नये जीवन को सहेजती है उसे अपनी परवरिश पे पूर्ण विश्वास होता है कि उसके बच्चे जीवन में स्वछंद उड़ेंगे और आकाश की नई ऊंचाइयों को छूऐंगे । चिड़िया का यह व्यवहार क्या मानव समाज के लिए एक प्रेरणा नहीं है ? जरूर चिंतन कीजिये.....
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