Wednesday, October 14, 2020

सुन्दरगढ़ से मोनालिसा बेहरा की रचना- कोणार्क


 रचियता-मोनालिसा बेहरा

सुंदरगढ़,(ओडिशा)

विधा- कविता

विषय-प्राचीन राष्ट्रीय धरोहर

शीर्षक-सूर्य-मंदिर' कोणार्क


ऐतिहासिक धरोहरों में है एक अमूल्य धरोहर

कोणार्क समुद्र तट पर बसा नाम उसका सूर्य मंदिर


ओडिशा के गौरव गाथा का गौरव गान करता

गंग वंशी राजा नृसिंहदेव की  यह उत्कृष्ट देंन


है बारहवीं सदी के निर्माण कला का उत्कृष्ट नमूना

बारह वर्षों के अथक परिश्रम का यह अद्वितीय भेंट


बारह जोड़ी पहियों पे खड़ा यह रथाकार आकृति

सात घोड़े हैं खींच रहे विराजमान बिरंची -नारायण


बारह महीने के प्रतीक हैं बारह चक्र रथ के चारो ओर

आठ  आरियां ,आठ पहरों के समय सूर्य को हैं दर्शाते


मानव,देव,गंधर्व,नर्तक,किन्नर हजारों आकृतियां है इसमें

कामुक इनकी भाव-भंगिमा है कामसुत्र पर आधारित


लाखों सैलानी आते हर वर्ष देखने इस बेजोड़ कलाकृति को

मानवीय निष्ठा एवम सौहार्दपूर्ण संगम के इस अनुठे नक्काशी को


पाषाण युग का ये पाषण धरोहर आज भग्नावशेष शेष है

कई किवदंतीयां ,कई कहानियां इससे जुड़ी विशेष हैं


काला पहाड़ जैसे कइयों का आक्रमण झेलता यह धरोहर

अपने ध्वंस की कथा कहता इसके सीने में कई राज दफन हैं


सूर्य-मंदिर है मूर्ति कला और शिल्प कला का अद्भुत संगम

प्राचीन धरोहर ना सिर्फ देश की विदेशों में भी चर्चित यह नाम।

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