Wednesday, October 14, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- प्राचीन धरोहर


 रचनाकार - लीलाधर कुम्हार

जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)

विषय - प्राचीन धरोहरों पर केंद्रित रचना

विधा - कविता

शीर्षक - प्राचीन धरोहर

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          // प्राचीन धरोहर //


इतिहास और सभ्यता की ,

होती है विशेष पहचान ।

प्राचीन धरोहर समाज की ,

गौरवशाली मंगल गान ।।


धार्मिक और प्राकृतिक विरासत ,

पूर्वजों की रहस्यमयी गाथा है ।

मानव विकास की सीढ़ी है यह ,

सभ्यता को आगे बढ़ाता है ।।


देश और दुनिया में अनेक ,

स्मारक तथा धरोहर ।

धर्म संस्कृति पर्यटन का जो ,

बना है केन्द्र मनोहर ।।


अजंता एलोरा की गुफाएँ ,

कोणार्क का सूर्य मन्दिर ।

ताजमहल और लाल किला ,

कर लो कुतुबमीनार की सैर ।।


चारोंधाम शिवज्योतिर्लिंग ,

बौद्ध बिहार पुरातन ।

जो है दुर्लभ मठ आश्रम ,

दर्शनीय स्थल पावन ।।


सिरपुर डोंगरगढ़ मल्हार ,

राजिम शिवरीनारायण ।

दंतेवाड़ा रतनपुर आरंग ,

यही है पुराना छत्तीसगढ़ ।।


धरती पर के सारे धरोहर ,

मूल्यवान मानवीय पूंजी है ।

शिक्षा और सभ्यता के स्रोत ,

उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है ।।


प्राचीन वैभव की जो निशानी ,

रहे सुरक्षित अजर अमर ।

शासन और समाज दोनों ही ,

समझे जिम्मेदारी बराबर ।।


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