रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - प्राचीन धरोहरों पर केंद्रित रचना
विधा - कविता
शीर्षक - प्राचीन धरोहर
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// प्राचीन धरोहर //
इतिहास और सभ्यता की ,
होती है विशेष पहचान ।
प्राचीन धरोहर समाज की ,
गौरवशाली मंगल गान ।।
धार्मिक और प्राकृतिक विरासत ,
पूर्वजों की रहस्यमयी गाथा है ।
मानव विकास की सीढ़ी है यह ,
सभ्यता को आगे बढ़ाता है ।।
देश और दुनिया में अनेक ,
स्मारक तथा धरोहर ।
धर्म संस्कृति पर्यटन का जो ,
बना है केन्द्र मनोहर ।।
अजंता एलोरा की गुफाएँ ,
कोणार्क का सूर्य मन्दिर ।
ताजमहल और लाल किला ,
कर लो कुतुबमीनार की सैर ।।
चारोंधाम शिवज्योतिर्लिंग ,
बौद्ध बिहार पुरातन ।
जो है दुर्लभ मठ आश्रम ,
दर्शनीय स्थल पावन ।।
सिरपुर डोंगरगढ़ मल्हार ,
राजिम शिवरीनारायण ।
दंतेवाड़ा रतनपुर आरंग ,
यही है पुराना छत्तीसगढ़ ।।
धरती पर के सारे धरोहर ,
मूल्यवान मानवीय पूंजी है ।
शिक्षा और सभ्यता के स्रोत ,
उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है ।।
प्राचीन वैभव की जो निशानी ,
रहे सुरक्षित अजर अमर ।
शासन और समाज दोनों ही ,
समझे जिम्मेदारी बराबर ।।
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