रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
विषय :- माँ
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- माँ का प्यार
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जननी जीवन दायिनी, करती जग कल्याण।
माँ तेरे उपकार से, मिला हमें यह प्राण।।१।।
लोरी सुनकर नित्य ही, हुए निद्रा में लीन।
बिन माँ बालक तड़पते, जैसे जल बिन मीन।।२।।
चाँद - चाँदनी की कथा, लोरी के वो गीत।
माँ तेरे आशीष में, बहे मधुर संगीत।।३।।
बोले बिन जो जान ले, और करे नित त्राण।
बच्चों में नित ही बसे, हर मैया के प्राण।।४।।
माँ ममता की रूप है, माँ में बसा जहान।
माँ से ही दुनिया चले, माँ से है इंसान।।५।।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने अपने दोहे के माध्यम से माँ का अपने बच्चों के प्रति अथाह प्रेम को प्रकट किया है।
Friday, October 16, 2020
महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- माँ
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