रचनाकार :- गजेन्द्र हरिहारनो " दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय:- माँ
विधा :- पिरामिड
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(01)
माँ !
तुम
कहाँ हो?
मेरे पास
जल्दी आओ न
लोरी सुनाओ न
मुझे सहलाओ न ।
(02)
माँ !
तुम
सदा हो
मेरे पास
मेरी यादों में
हर श्वांस में हो
हर पल साथ हो ।
(03)
माँ !
तेरे
बिना ये
घर-द्वार
रसोई घर
खेत खलिहान
सूना ही लगता है ।
(04)
माँ !
तुम
ममता
की मूरत
ये तेरे बच्चे
तेरी ममता की
चाहत में जीते हैं ।
(05)
हे!
नारी
भवानी
जगदम्बा
तेरे संतान
करते प्रणाम
आशीर्वाद दे दो माँ ।
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गजेन्द्र हरिहारनो 'दीप "
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
(सर्वथा मौलिक सृजन )
Friday, October 16, 2020
राजनांदगांव से गजेन्द्र हरिहारनो " दीप" की रचना- माँ
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दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
बहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteवाह क्या बात है... माँ की महिमा का सुंदर चित्रण
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteमां के चरणों की वंदना कर। गुरुवर को प्रणाम। बहुत सुन्दर रचना है।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDelete👍👌👌👌👌👌👌
ReplyDelete◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
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मैं
तुम
हमसब
कहीं दूर
चलते हैं आज
मौसम सुहाना
मौज मस्ती
मनाते हैं
आज
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😇
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