Friday, October 16, 2020

राजनांदगांव से गजेन्द्र हरिहारनो " दीप" की रचना- माँ

रचनाकार  :- गजेन्द्र हरिहारनो " दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय:- माँ
विधा  :- पिरामिड
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         (01)
माँ !
तुम
कहाँ हो?
मेरे पास
जल्दी आओ न
लोरी सुनाओ न
मुझे सहलाओ न ।
      (02)
माँ !
तुम
सदा हो
मेरे पास
मेरी यादों में
हर श्वांस में हो
हर पल साथ हो ।
   (03)
माँ !
तेरे
बिना ये
घर-द्वार
रसोई घर
खेत खलिहान
सूना ही लगता है ।
    (04)
माँ !
तुम
ममता
की मूरत
ये तेरे बच्चे
तेरी ममता की
चाहत में जीते हैं ।
   (05)
हे!
नारी
भवानी
जगदम्बा
तेरे संतान
करते प्रणाम
आशीर्वाद दे दो माँ ।
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गजेन्द्र हरिहारनो 'दीप "
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
(सर्वथा मौलिक सृजन )


8 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना

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  2. वाह क्या बात है... माँ की महिमा का सुंदर चित्रण

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  3. मां के चरणों की वंदना कर। गुरुवर को प्रणाम। बहुत सुन्दर रचना है।

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  4. 👍👌👌👌👌👌👌
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    मैं
    तुम
    हमसब
    कहीं दूर
    चलते हैं आज
    मौसम सुहाना
    मौज मस्ती
    मनाते हैं
    आज
    ■
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    .

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