Friday, October 16, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- मातृशक्ति

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - माँ
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मातृशक्ति
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       //  मातृशक्ति  //

भारत की संस्कृति अपनाकर ,
जीवन - पथ पर बढ़ना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण ,
आज सभी को करना है ।।

फैशन की दुनिया मे नारी ,
आज स्वयं को भूल गई ।
डिस्को टी.व्ही. और सिनेमा ,
विज्ञापन में खो गई ।।
कुल मर्यादा लाज को छोड़ी ,
कैसी विडंबना है ?
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

माँ का गौरव पद पाकर ,
नारी धन्य हो जाती है ।
वात्सल्यमयी मातृत्व की ,
अमृतपान कराती है ।।
माँ के आगे स्वर्ग तुच्छ है ,
महिमा हमें समझना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

माँ की शीतल छाया में ,
शिशु निर्भय हो जाता है ।
प्रथम गुरु का पाठ पढ़ाती ,
जीवन भर मुस्काता है ।।
श्रद्धा और समर्पण से ,
हमें काम यह करना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

जीजाबाई बन जायें हम ,
वीर शिवाजी गोद मे खेले ।
लक्ष्मीबाई दुर्गावती बन ,
गद्दारों से लोहा ले लें ।।
अबला नहीं कहायेंगी ,
देश हेतु मर मिटना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

कौशिल्या अनुसूया बनकर ,
प्रभु को दूध पिलानी है ।
सीता और सावित्री जैसी ,
स्त्री धर्म निभानी है ।।
है अतीत गौरवशाली ,
दीन - हीन क्यों बनना है ?
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

पैदा करें विवेकानंद ,
गाँधी तिलक सुभाष ,
बुद्ध कबीर दयानन्द को ,
देखे सुने समाज ।।
देशभक्त सेवाव्रती ,
बच्चों को नित गढ़ना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण,.....

ध्रुव प्रह्लाद वीर अभिमन्यु ,
घर - घर में हो जाये ।
भगतसिंह बिस्मिल आजाद ,
पुनः देश में आये ।।
भारत माँ की देख दुर्दशा ,
मौन नहीं अब रहना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

माँ की ममता दिव्य है ,
स्नेह सुधा बरसाती ।
त्याग और करुणा की देवी ,
जगदम्बा कहलाती ।।
पूत कपूत भले हो जाये ,
किन्तु कुमाता सपना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

माँ - बहनों की महिमा जागे ,
यही हमारा नम्र निवेदन ।
मानवता की सेवा में ,
अर्पित हो अपना जीवन ।।
आओ मिलकर कदम बढ़ायें ,
पीछे कभी न हटना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण.....

भारत की संस्कृति अपनाकर ,
जीवन पथ पर बढ़ना है ।
मातृशक्ति का पुनर्जागरण ,
आज सभी को करना है ।।

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