Wednesday, October 7, 2020

नलिनी बाजपेयी की रचना- जीवन

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर (छ .ग.)
      विषय :- *जीवन का महत्व*
(परिसंख्या अलंकार का प्रयोग)
  दिनाँक :-07/10/20
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~ •°•●  *जिंदगी* •°•● ~
अजब गजब 
  रूप दिखाती है
    जिंदगी।

कभी गमगीन 
  कभी हसीन बनाती है
     जिंदगी।

अजीब नखरें तेरे,
   बड़ी कहर ढहाती है
       जिंदगी।

तड़पन है,सिसकन है
  कडुवें घूंट पिलाती है-
     जिंदगी।

कहीं राग-रागिनी कहीं
   स्वर्णिम आभा दिखाती है
          जिंदगी।

भोर बचपन, मध्यान्ह जवानी 
    संध्या बुढ़ापा कहानी है
          जिंदगी।

कहीं धूप,कहीं छाँव        
   सुख-दुःख की रवानी है
          जिंदगी।

माँ की लोरी में सुलझी,
    कर्तव्य बोध में है उलझी है
         जिंदगी।

सदियों में सिमटी कभी      
  सदियों पलों वाली.
        जिंदगी।

अजीब दास्ताँ, रुपहले       
    किस्सों की निशानी है
         जिंदगी।
*परिसंख्या अलंकार का उदाहरण*

1.कभी गमगीन,कभी हसीन है।
2.तड़पन है सिसकन है।
3.कहीं धूप,कहीं छाँव है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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