जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - संगीत
विधा - मुक्त
शीर्षक - सृष्टि का संगीत
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// सृष्टि का संगीत //
सृष्टि में संगीत भरा है ,
जान सके तो जान ।
लय सुर ताल राग और छंद ,
कण - कण में विद्यमान ।।
नभ में बादल का मंडराना ,
गड़ - गड़ गर्जन घोर ।
यह भी तो संगीत है ,
वन में नाचे मोर ।।
झिमिर - झिमिर वर्षा रानी ,
टप - टप बून्द गिराती ।
ताल मिलाते मेंढक भाई ,
टर्र - टर्र राग प्रभाती ।।
नदिया नाले और झरना ,
कल - कल बहती जाये ।
अमराई में कुहू - कुहू ,
कोयल गीत सुहाये ।।
भोर में सारे पक्षी जागे ,
मुर्गा बोले कुकड़ूँ - कूँ ।
चूँ - चूँ करती गौरैया - मैना ,
गाये कबूतर गूटर - गूँ ।।
जंगल खेत और उपवन में ,
शांति का नीरव संगीत ।
स्वच्छ चाँदनी रात लुभाती ,
गाये चंदा मामा गीत ।।
ऊवाँ - ऊवाँ की तान छेड़ते ,
मानव शिशु नवजात ।
परमात्मा की मूल ध्वनि ,
ॐ संगीत उवाच ।।
साँसों की माला सुमिरन में ,
सोहम् का संगीत है ।
अनजाने में प्राणी जपते ,
अपने आपसे प्रीत है ।।
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