डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव ( छत्तीसगढ़)
विषय :- रणभूमि
विधा :- आलेख ( गद्य )
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मानव जीवन एक रणभूमि
जीवन पशु रूप में हो या कीट पतंगों के रूप में या फिर मानव के रूप में ; जीवन एक यात्रा के समान है क्योंकि प्रत्येक जीवन के बाद अंत भी निश्चित है । अतः जीव कुछ समय की यात्रा पर ही आता है और चला जाता है ।
मानव सभी जीवों में एक सर्वोत्कृष्ट जीव है जो अपनी बुद्धि को विकसित भी कर सकता है । अतः उसने अपनी बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए सोचा यदि पृथ्वी पर सिर्फ मानव जाति का ही राज हो जाए तो उसे नित अन्य जीवों के डर से मुक्ति मिल जाएगी और मानव स्वतंत्र रूप से निर्भय होकर जीवन निर्वाह कर सकेगा । अपने इसी महत्त्वाकांक्षा के कारण ही मानव जीवन में संघर्ष का प्रादुर्भाव हुआ ।
जीवन एक संग्राम है, योद्धा हम सब लोग ।
लड़ यहाँ जी जान से , याद रखे सब लोग ।
मनुष्य का जीवन एक विकास यात्रा है, जिसके मार्ग में अनेकों अवरोध , बाधायें और ठहराव आते रहते हैं । समझ-बूझ और आत्म विश्वास के सहारे आगे बढ़ते हुए यह जीवन यात्रा सफलताओं की ओर बढ़ती है । यूँ तो शैक्षिक, आर्थिक व सामाजिक लक्ष्यों की पूर्ति को ही हम जीवन का विकास मानकर चलते रहते हैं, लेकिन जब मनुष्य के अंदर से लोभ , मोह , क्रोध , ईर्ष्या , द्वेष , अहंकार आदि निम्नतर प्रवृत्तियों का हस्तक्षेप लगातार मानवता की राह में रोड़े अटकाता है , तब पतन के हजारों रास्ते खुल जाते हैं और संपूर्ण प्रगति मनुष्य के अमानवीय कर्मों के कारण एक विनाशकारी अभियान में परिवर्तित होने लगती है । अज्ञानता की ऐसे भूल भुलैया में पड़कर विकास की विपरीत दिशा ही मनुष्य को जीवन की दिशा दिखाई देने लगती है । पतन के ऐसे घोर अन्धकार में भी महापुरुषों के अमृत वचन प्रकाश स्तंभ बन जाते हैं । उनकी कृपा से जीवन में सत्य से साक्षात्कार होता है और जीवन में वास्तविक प्रगति की समग्र क्रांति उद्घाटित हो उठती है ।
श्री राम चरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानव जीवन के लिए संकेत दिया है कि :-
महा अजय संसार रिपु , जीति सकइ सो बीर ।
जाकें अस रथ होइ दृढ़ , सुनहु सखा मति धीर ।।
अर्थात मनुष्य को इस संसार में रहते हुए उस विजय रथ पर सवार होना चाहिए जिसमें शौर्य और धैर्य रूपी पहिये लगे हुए हों । सत्य और शील ( सदाचार ) रूपी ध्वज और पताका फहराता रहे । बल , विवेक , दम और परोपकार रूपी घोड़े क्षमा , दया और समता रूपी डोर से रथ में जुड़े हुए हों । ईश्वर का भजन रूपी सारथी हो । वैराग्य रूपी ढाल , संतोष रूपी तलवार , दान रूपी फरसा , बुद्धि रूपी प्रचंड शक्ति , श्रेष्ठ विज्ञान रूपी कठिन धनुष , निर्मल और स्थिर मन रूपी तरकस , शम-यम-नियम रूपी अनेकों बाण तथा ब्रह्मवेत्ता गुरु के आशीर्वाद रूपी कवच हो ।
यदि सब मनुष्यों के पास ऐसा धर्म मय रथ हो तो फिर उसके जीतने के लिए कहीं शत्रु ही नहीं होगा ।
समय का दरिया बहता जाए
बहते बहते कहता जाए
जीवन एक संघर्ष है
जीवन एक संघर्ष है
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गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
( मौलिक सृजन )
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