जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - शीतलता
विधा - मुक्त
शीर्षक - शीतलता
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// शीतलता //
शीतल हो मन बुद्धि हृदय ,
ऐसी पद्धति अपनाओ ।
मानवता का फूल खिले ,
जग में हँसो - हँसाओ ।।
तम जीवन से दूर हो जाये ,
पूनम का हो शीतल चाँद ।
झूठ कपट निंदा नफरत और ,
दुःखों की आँधी हो शांत ।।
लगन लगा लो अपने प्रभु से ,
प्रेम और कर्तव्य - बोध ।
शीतलता का अनुभव कर लो ,
कर लो निज आत्मा की शोध ।।
ताल और सुर मिला लो बंदे ,
गीत खुशी के राग में ।
कोरोना वायरस भी भस्म हो जाये ,
शीतलता की आग में ।।
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