Friday, October 23, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- शीतलता

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - शीतलता
विधा - मुक्त
शीर्षक - शीतलता
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           // शीतलता //

शीतल हो मन बुद्धि हृदय ,
ऐसी  पद्धति   अपनाओ ।
मानवता का  फूल  खिले ,
जग  में  हँसो - हँसाओ ।।

तम  जीवन  से दूर  हो जाये ,
पूनम  का हो  शीतल  चाँद ।
झूठ कपट निंदा नफरत और ,
दुःखों की  आँधी  हो शांत ।।

लगन  लगा लो अपने  प्रभु से ,
प्रेम     और     कर्तव्य - बोध ।
शीतलता का अनुभव  कर लो ,
कर लो निज आत्मा की शोध ।।

ताल   और   सुर   मिला   लो  बंदे ,
गीत     खुशी      के      राग     में ।
कोरोना वायरस भी भस्म हो जाये ,
शीतलता     की      आग       में ।।

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