राज्य: छत्तीसगढ़
जिला: रायगढ़
शीर्षक: नारी की कहानी
विधा: छंदमुक्त कविता
कभी सीता बन राम के संग, वन को जाती है।
कभी मीरा बन कृष्ण प्रेम के, गीत गाती है।
कभी सावित्री बन यम से, सत्यवान ले आती है।
समय-समय पर अपना, नया स्वरूप दिखाती है।
कभी माँ बन सब पर अपना, प्यार लुटाती है।
कभी बहन बन भी को, प्यार से समझाती है।
कभी बेटा बन अपना, हर एक फ़र्ज़ निभाती है।
कभी बेटी बन माँ के संग, हाथ बटाती है।
कभी बहु बन दोनों कुल में, नाम कमाती है।
कभी पत्नी बन हर कर्म में, पति का साथ निभाती है।
कभी चालक बन, ऑटोरिक्शा तक चलाती है।
कभी पायलट बन, वायुयान को उड़ाती है।
कभी कल्पना बन, अंतरिक्ष तक जाती है।
कभी दुर्गा बन असुरों का, वध कर जाती है।
कभी माँ यशोदा बन, वात्सल्य का गीत गाती है।
समय-समय पर अपना, नया स्वरूप दिखाती है।
नारी की तो बड़ी ही, अज़ब कहानी है।
यह करूणा, वात्सल्य, प्रेम और स्नेह की रानी है।
स्वरचित मौलिक कविता
-इन्दु साहू,
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
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