स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"शीतलता "
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शीतल पवन-शीतल जल
तन को शीतलता देते
और शीतल व्यवहार
जीवन को शीतल कर देते
मन शीतल तो सब शीतल
शीतल संसार होता
वरना गर्मजोशी से तो
रक्त खौले और हाहाकार होता
मन की शीतलता
बड़ी जरूरी होती है
वरना काम बिगड़ने में
जरा भी देर नहीं होती है
शांत चित्त मन में
अच्छे ख्यालों का पुलिंदा
वर्ना बेमन के काम से
सदा नुकसानों का बेड़ा
शीत ऋतु हो या शीतल वाणी
दोनों गर्मी से बचाते
एक तन को दूजा मन को
दोनों ही संसार को सजाते
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