Wednesday, October 7, 2020

गावस्कर कौशिक की रचना- जीवन

रचनाकार- गावस्कर कौशिक
जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
विषय- जीवन का महत्व
शीर्षक- चलते रहना जीवन है
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सुख  की  चाहत में   दुखों को भी गले लगाना हैं
न बैठो तुम मन हार के अगर मंजिल को पाना है।।

हर चुनौती को तुम करो स्वीकार न मानों तुम हार
दृढ़ संकल्पित हो,  बढ़ आगे हो जाना हैं तुम्हें पार।।

जीवन के संघर्ष पथ पर , निरन्तर तुम्हें बढ़ते जाना है
कभी दुःख तो कभी सुख,एक-दूजे का आना जाना है।।

जब राह सूझे न कोई तब, देखो नदी की धाराओं को
राह अपनी खुद बनाती है , पार कर के बाधाओं को।।

देखो सूरज को तुम बादलों को करके पार ढलता है
अँधेरी रातो में भी  शीतलता लिए चाँद निकलता है।।

जीवन में भी हमारे चाँद सूरूज का आना जाना है
कभी शीतलता कभी उष्णता कुदरत का पैमाना है।।

हर परिस्थिति में हमे बस निष्काम कर्म करते जाना है
जीवन एक संघर्ष पथ है, हमे चलते चलते ही जाना है।।

चलते रहना ही जीवन है ,  रुकना अंत है जीवन का
बहते रहना निरंतर वैसे ही, गति होती जैसे पवन का।।

फूल है  तो  कांटे भी  मिलेंगे  , जीवन ऐसी  उपवन है
रुक न जाना ओ राही हार के,चलते रहना ही जीवन है ।।
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          गावस्कर कौशिक
          सुकमा, ( छ्ग )

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