Wednesday, October 7, 2020

मनोरमा पटनायक की रचना- जीवन

रचनाकार :- मनोरमा पटनायक 
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
 वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा 
विषय :-  जीवन का महत्व 
 विधा :- कविता (मुक्त छंद )
अलंकार :- परिसंख्या अलंकार 

जिंदगी हमेशा कुछ, नया सिखाती है l
 कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है l।

 कभी मीठे ख्वाब तो , कभी कड़वी सच्चाई दिखाती है l
 हमेशा एक नया, सबक सिखाती है l।

 रिश्तो के बंधन में,हम खो  से जाते हैं l
 भीड़ में खुद को, कभी अकेले पाते हैं l।

किसी का प्यार,आंखें छलका देता है l
किसी का तकरार,पलके झपका देता है।।

कभी प्यार जीने की वजह 
देता है l
तो जुदाई तन्हाई से सबक लेता है।।

कभी इतना दर्द होता है, कि 
हमें नींद नहीं आती है l
कभी खुशियाँ हमसे नींद चुराती है।।

कभी यह सोच कर उदास हो जाते हैं, कि हमें कुछ मिला नहीं l
तो कभी यह सोचते रह जाते है, जो मिला उसे सहेजा नही।।

हर पल कुछ पाने की इच्छा,कुछ खोने का डर है l
सपने अपने पर सुनी सी डगर है।।

यह कैसी जिंदगी, जो एक सवाल है l
ना समझ सकी जीवन को मैं,बस यही मलाल है।।

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