स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- लघु-कथा
शीर्षक -"दार्शनिक "
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एक बार एक भीड़ में कुछ युवकों के बीच में झड़प हुई उनके इस झड़प का कारण दुनिया में सबसे अधिक स्थान को देखने को लेकर थी । तभी वहां से गुजर रहे एक युवक रुका और करीब आकर लड़ाई का कारण पूछा और कहा कि चाहे लाख स्थानों के दर्शन कर लो पर इसकी दूरदर्शिता का चिंतन और तुलनात्मक अध्ययन ना कर सको और इसका मनन कर उसे भावी पीढ़ी तक ना पहुंचा सको , तो खुद के घर के कमरों को भी न देखने के बराबर है ।सभी शब्द सुनकर स्तब्ध थे । वह युवक कोई और नहीं महान दार्शनिक अरस्तू थे ।
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