Friday, October 9, 2020

लीलाधर कुम्हार की रचना- दार्शनिक प्रश्न

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - दार्शनिक
विधा - मुक्त
शीर्षक - दार्शनिक प्रश्न
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       //  दार्शनिक प्रश्न  //

सृष्टि की रचना विचित्र है ,
हर घटना एक चमत्कार ।
करें समीक्षा - विश्लेषण तो ,
नित्य नवीन रहस्य अपार ।।

अति अद्भुत है यह ब्रह्माण्ड ,
ग्रह - नक्षत्र की गति - स्थिति ।
प्रकृति का पल - पल परिवर्तन ,
दिव्य अलौकिक परिस्थिति ।।

ठण्डी गर्मी वर्षा होते ,
धूप - छाँव दिन - रात ।
एक बीज से वृक्ष अनन्त ,
घोर आश्चर्य की बात ।।

पानी मिट्टी हवा एक ही ,
होते मिर्च करेला गन्ना ।
स्वाद अलग रंग - रूप अलग ,
मुश्किल है इसको समझना ।।

साँसे और धड़कन चलती ,
खाना कैसे पच जाता है ?
ऐसी कौन सी चेतना है जो ,
सब जीवों को जिलाता है ??

दाना - चारा खाकर गाय ,
देती पौष्टिक सफेद दूध ।
रोटी सब्जी दाल से ही ,
तन - मन का परिवर्तित रूप ।।

किसकी सत्ता से होती है ,
सारे  क्रिया  कलाप ।
इस दार्शनिक प्रश्न का ,
क्या होगा सटीक जवाब ??

श्रद्धा और आस्था से मानते ,
विविध धर्म समुदाय पंथ ।
विज्ञान भी अब नतमस्तक है ,
है कोई परम शक्ति अनंत ।।

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